एक दिन, एक शेर एक गुफा में सो रहा था और एक चूहे ने उसे परेशान करने का फैसला किया
ताई ना ने नई ना ताई ना ने नई ना
मुर्ख चूहे! तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे नींद जगाने की? ले अब मैं तुझे इसकी सज़ा देता हूँ। मैं तुझे अभी कच्चा चबा जाऊंगा।
नहीं नहीं ऐसा मत करो महाराज!, मुझसे गलती हो गई। और वैसे भी मैं तो बहुत छोटा हूँ जिससे आपकी भूख भी नहीं मिटेगी। किसी दिन मैं आपकी कोई मदद कर सकू
शेर ने मन ही मन सोचा कि इतना छोटा सा चूहा मेरी क्या मदद कर पायेगा लेकिन फिर भी चूहे को विनती करते देख शेर को उसपे दया आ गई और उसने चूहे को छोड़ दिया।लेकिनइसके कुछ दिनों बाद शेर एक शिकारी के जाल में फंस जाता है
महाराज आप चिंता बिल्कुल न करें। मैं अभी इस जाल को अपने दातों से काटकर आपको आज़ाद कराता हूँ।
थोड़ी ही देर में चूहे ने उस जाल को अपने पैने दातों से काटकर शेर को आज़ाद करा लिया। शेर चूहे के इस काम से बड़ा खुश हुआ
दोस्त मैं तुम्हारा ये एहसान कभी नहीं भूलूंगा, तुमने आज मेरी जान बचाकर मुझपे बहुत बड़ा उपकार किया है।
नहीं महाराज एहसान तो उस दिन आपने मेरी जान बख्शकर मुझपे किया था। यदि आप उस दिन मुझपे दया नहीं दिखाते तो आज शायद मैं आपकी मदद नहीं कर पाता।
आज से तुम ही मेरे सच्चे मित्र हो।
कहानी से शिक्षा :कभी भी किसी को अपने से छोटा या कमजोर नहीं समझना चाहिए।
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